जटाशंकर धाम बिजावर छतरपुर मध्य प्रदेश 2022

आज के इस लेख में हम बुंदेखंड क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण श्रृद्धालुओ का क्षेत्र जटाशंकर धाम अर्थात् Jtashakar dham के बारे में जानकारी

जटाशंकर धाम बिजावर मध्यप्रदेश

जटाशंकर धाम में स्थित तीन पानी की छोटी सी कुड़िया जिसमे पानी कहा से आता है और कैसे निकलता है। यह अभी तक पता नहीं है सबसे बड़ी विशेषता इन कुड़ियों की यह हैं कि यह खाली नही होती चाहे मौसम गर्मी ठंडी अथवा बरसात का हो। इस धाम पर जो श्रृद्धालु सचे मन से कुड़ियों के पानी से स्नान करते हैं उन की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

जटाशंकर धाम छतरपुर

जटाशंकर धाम में शिव जी की पूजा दिन में तीन बार होती है सुबह प्रातः काल 5बजे से 7 बजे तक दोपहर में 1बजे से 2 बजे तक तथा शाम को 6बजे से 8 बजे तक होती है पूजा के समय सभी भक्तो को बाहर रोक दिया जाता है पूजा होने पर कोई भक्त को अंदर नही जाने मिलता है

जटाशंकर धाम कहां है

मध्य प्रदेश के जिला छतरपुर तहसील बिजावर पास स्थित है। यह बिजावर से 15 किलोंमीटर दूरी पर पूर्व दिशा की ओर है यहा पर भोले नाथ का भव्य मंदिर है। पहले शिव जी की सबसे बड़ी मूर्ति है उसके बाद लगभग 508 श्रेणियां चढ़ने के बाद भोले बाबा के दर्शन होते हैं। इसे और ऊपर जानें पर एक और मन्दिर है जिसमे शिव जी बिराजे है। वहा पर भोले नाथ के भक्तो को नन्दी बैल के भी दर्शन होते हैं।

जटाशंकर छतरपुर से कैसे पहुंचे

छतरपुर से 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जटाशंकर धाम में लगभग 508 श्रेणियां है। उसके ऊपर जानें बाद भक्तो को भोले नाथ जी के दर्शन होते हैं

जटाशंकर धाम के मंदिर

जटाशंकर धाम में शिव जी की सबसे बड़ी मूर्ति मिलती है। उस के बाद तीनों कुड़ियों में स्नान करते हैं इस के बाद जटाधारी को जल चढ़ाते हैं तथा गौ मुख से से घिरने वाले जल से स्नान करते हैं इस बाद सबसे ऊपर एक मंदिर है जहां पर तीन सीग तथा तीन आंखो बाला एक नन्दी बैल के दर्शन होते हैं नन्दी जी कि तीसरी आंख बंद है वहा बताया जाता है कि यदि तीसरी आंख खुल जाएगी तो महापिलय आ जाएगी ऐसा वहा के पुजारियो का कहना है।

जटाशंकर धाम छतरपुर

जटाशंकर धाम की विशेषता

1.जटाशंकर धाम में तीन कुड़िया है जिनका पानी गर्मियों मे ठंडा वा ठंडियो में गर्म पानी निकलता है तथा कुड़ियों का पानी कभी भी खत्म नहीं होता है 2.जटाशंकर धाम में गम्भीर से गम्भीर बीमारी का समाधान करते हैं भोले नाथ। 3.यहां पर पहाड़ों के बीच से जटा निकले दिखाई देते है जिससे उनका जटा शंकर नाम पड़ा है। 4.जटाशंकर धाम में तीन आंखो वा तीन सीग वाला नादिया है जिससे हम लोग नन्दी बैल भी कहते हैं। 5. जटाशंकर धाम जाने का महत्वपूर्ण दिन अमावस्या, पूर्णिमा तथा वैशाख मास, सावन माह सोमवार

6 जटाशंकर धाम में पुजा दिन में तीन बार होती है सुबह प्रातः काल में 5 बजे से 7 बजे तक दोपहर में 1 बजे से 2 बजे तक शाम 6 बजे से 7 बजे तक होती है।

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